राजस्थान का अपवाह तंत्र | राजस्थान का अपवाह तंत्र नदियां एवं झीलें | Rajasthan GK

By | August 18, 2018

राजस्थान का अपवाह तंत्र

राजस्थान मे चम्बल व माही के अतिरिक्त अन्य कोई नदी बारहमासी नहीं है।

. राज्य में सबसे अध्कि सतही जल चम्बल नदी में उपलब्ध है।

. राजस्थान की अधिकांश नदियों का अरावली पर्वत के पूर्व में प्रवाह क्षत्रे है

. राज्य में बनास नदी का जलग्रहण क्षेत्रा सबसे बड़ा है।

. राज्य में सर्वाधिक नदियाँ कोटा संभाग में है।

. राजस्थान की सबसे बड़ी नदी चम्बल है।

. पूणर्तः राज्य मे बहने वाली सबसे बड़ी नदी बनास है

. भारत सरकार द्वारा राजस्थान भूमिगत जल बोर्ड
की स्थापना की गई 1955 में इस बोर्ड का नियंत्राण राजस्थान सरकार को सौप दिया। 1971 से इस बोर्ड को भू-जल विभाग के नाम से जाना जाता है इसका कायार्लय जौधपुर है

. राज्य के पूर्णतः बहने वाली सबसे लंबी नदी तथा सर्वाधिक जलगह्रण क्षेत्रा वाली नदी बनास है

. चम्बल नदी पर भैंसरोडगढ चित्ताडै़गढ के निकट चूलिया प्रपात तथा माँगली नदी पर बूँदी मे भीमलत प्रपात है

. सर्वाधिक जिलों में बहने वाली नदियाँ  चम्बल, बनास व लूनी। प्रत्येक नदी 6 जिलों में बहती है।

. अंतरराज्यीय सीमा राजस्थान व मध्यपद्रेश की सीमाद्ध बनाने वाली राज्य की एकमात्रा नदी चम्बल है

राजस्थान की नदियां को तीन भागों मे  विभक्त किया गया हैः-

1. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ

चम्बल, बनास, काली सिंध, पार्वती, बाणगंगा, खारी, बेड़च, गंभीर आदि नदियाँ अरावली के पूर्वी भाग में विद्यमान है। इनमें कुछ नदियों का उदग्म स्थल अरावली का पूर्वी ढाल तथा कुछ का मध्यप्रदेश का विन्ध्याचल पर्वत है। ये सभी नदियाँ अपना जल यमुना नदी के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में ले जाती है

2. अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ

माही, सोम, जाखम, साबरमती, पश्चिमी बनास, लूनी आदि। पश्चिमी बनास व लूनी नदी गुजरात में कच्छ के रन में विलुप्त हो जाती है।

3. अन्तः प्रवाहित नदियाँ

उपरोक्त के अतिरिक्त कुछ छोटी नदियाँ भी हैं जो कुछ दूरी तक प्रवाहित होकर राज्य में अपने पव्राह क्षेत्रा मे ही विलुप्त हो जाती हैं तथा जिनका जल समुद्र तक नहीं जा पाता है इन्हें आंतरिक जल प्रवाह की नदियाँ कहा जाता है। ये नदियाँ हैं- काकनी, काँतली, साबी, घग्घर, मेन्था, बाँडी, रूपनगढ़ आदि।
राज्य में चुरू व बीकानेर ऐसे जिले हैं, जहाँ कोई नदी नहीं हैं।

चम्बल नदी

  • चम्बल नदी को राजस्थान की कामधेनू व चर्मण्वती के नाम से जानते है।
  • चम्बल नदी का उद्भव मध्य प्रदेश में महु के निकट जनापाव की पहाड़ियों से होता है जो कि विंध्य पर्वत श्रेणी का भाग है
  • चम्बल नदी चौरासीगढ़ के निकट राजस्थान में प्रवेश करती है
  • यह दक्षिणी पूर्वी राजस्थान – चित्ताडै गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधेपुर, करौली व धैलपुर में बहती हुई इटावा (UP) के निकट मुरादगंज के समीप यमुना मे मिल जाती है
  • चम्बल नदी की कुल लम्बाई 1051 किमी. है।
  • चूलिया जलप्रताप चित्तौड़गढ़द्ध में स्थित है जिसका निर्माण चम्बल नदी करती है
  • राज्य में सर्वाधिक सतही जल चम्बल नदी में उपलब्ध है तथा बीहड भी सर्वाधिक इसी नदी क्षेत्रा मे हैं।
  • चम्बल नदी द्वारा राज्य मे सर्वाधिक अवनालिका अपरदन किया जाता है
  • चम्बल की सहायक नदियाँ – राजस्थान में मिलने वाली – आलनिया, परवन, बनास, कालीसिंध्, पार्वती, बामनी, कुराल, मेज, छोटी काली सिंध आदि
  • चम्बल नदी पर चार बाँध बनाए गए है – 1. गांधी सागर बांध् (MP) 2. राणा प्रतापसागर बाँध 3. जवाहर सागर बाँध , कोटा 4. कोटा बैराज बाँध

 

बनास नदी 

  • बनास नदी को वन की आशा व वर्णशा भी कहते है।
  • बनास नदी को राजस्थान की यमुना भी कहते है।
  • बनास नदी अरावली की खमनौर की पहाड़ियां से निकलती है जो कि कुम्भलगढ़ से 5 किमी. कि दूर स्थित है
  • बनास नदी की लम्बाई लगभग 512 किमी. यह पूर्णतः राज्य में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है
  • बनास नदी के तट के टोडारायसिंह कस्बे के निकट बीसलपुर बाँध बनाया गया है।
  • सहायक नदियाँ- बेड़स, काठेरी, खारी, मनैल, बाण्डी, मानसी ढूंढ, गम्भीरी, आरैइ मोरेल है

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