राजस्थान के लोकगीत | Folk Songs Of Rajasthan | Margdarshan Academy

By | August 21, 2018

राजस्थान के लोकगीत

केसरिया बालम –  राज्य गीत यह एक रजवाड़ा गीत है जिसमें पति का इंतजार करती पत्नी की  व्यथा का वर्णन है

मोरियो-   उस लड़की द्वारा गाया जाने वाला गीत जिसका संबंध  हो चुका है लेकिन शादी नहीं हुई

सुवटिया –   परदेश गए पति के पास तोते के माध्यम से संदेश भेजती भील महिला का गीत

कुरजा –  परदेस गए पति से मिलन की कुरजा से की गई गुजारिश|

कागा –  काका को उड़ाकर पत्नी अपने पति के आगमन का शगुन बनाती है

पीपली –   विरह गीत,इसमें पत्नी द्वारा पति से प्रदेश न जाने की विनती करती है | मारवाड़ व शेखावटी में तीज पर गाया जाता है

कामण –  वर को जादू टोने से बचाने के लिए गए जाने वाला गीत|

सिठणें –  विवाह अवसरों पर महिलाओं द्वारा गाए जाने वाला गीत|

गोरबंद-  ऊंट के गले का एक आभूषण( शेखावटी क्षेत्र में इसे बनाते समय गाए  जाने वाला गीत)

चिरमी –  ससुराल में अपने भाई पिता भाई की प्रतीक्षा करती वधु द्वारा गाए जाने वाला गीत|

बधावा –  शुभ कार्यों के संपन्न होने पर गाए जाने वाला गीत|

पावणा –  दामाद के ससुराल आने पर गाया जाने वाला गीत|

 हमसीढो – वीर महिला, पुरुषों द्वारा गाया जाने वाला गीत|

पणिहारी –  अपने पतिव्रत धर्म पर अटल स्त्री का गीत|

बिछुडो –  हाड़ौती क्षेत्र का एक लोकगीत|

हिचकी –  मेवात क्षेत्र का एक लोकगीत|

ढोला मारू –  सिरोही क्षेत्र का एक लोकगीत|

पपीहा – पत्नी एवं पति के बीच आदर्श दांपत्य प्रेम का सूचक|

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