Story of A Girl Who is Writing A Letter To God.
Dear God
ये चिठी सिर्फ और सिर्फ आपके लिए लिख रही हूँ..अभी मैंने स्कूल जाना शुरू ही किया है और मै बहूत छोटी भी हूँ। कुछ गलती हो या आपको समझ नही आये तो आज शाम जब मे मंदिर आऊ तब पूछ लेना..
वो क्या है ना कि मुझे एक भाई चाहिए जीसको मै राखी बांधू और जिसके साथ मै खेलु..ऐसा नही है कि मै बहन के साथ नहीं खेल सकती या उसे राखी नही बांध सकती..
दादी कहती है कि राखी तो भाई को ही बांधी जाती है जब मेने पूछा क्यों हाथ तो मेरी बहन के भी होंगे..तब दादी बहुत गुस्सा हुई और बड़ी बड़ी आँखे निकाली और बोला के दादी अम्मा ना बन..और सुबह शाम धोक दे भगवन को और भाई माँग।

A Letter To God:

मैंने तो रोज माँगा आपसे पर आपने तो बहन दे दी मुझको..मैं नाराज़ नही हु आपसे क्योकि मेरी छुटकी तो बहुत ही प्यारी है। पर जब वो आई तब पापा दादी सब गुस्सा हुए थे माँ पर।मुझे ये समझ नही आया जब गलती आपकी थी तो माँ को क्यों डांट पड़ी।इसलिए में आपसे नाराज थी..पर जब मेरी छुटकी अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे टुकुर टुकुर देखती है तब मे अपनी नाराजगी भूल गयी।
पिछले साल फिर दादी बता रही थी की इस बार तो बाबाजी ने बोला हे कि उनको पोता ही होगा….कितनी खुश थी दादी उस दिन..सारे काम भी खुद ही करती थी..फिर जब माँ दो महीने बाद दवाख़ाने गयी तो डॉक्टर मैडम ने बोल दिया कि बहन होगी.पता नही डॉक्टर मैडम ज्यादा समझदार थी या बाबाजी, पर पापा ने तो डॉक्टर की बात को ही माना और मेरी बहन को पता नही गिरा दिए..कितनी लगी होगी उसको मुझे तो ये भी नही पता..माँ बोलती रही के मै अपना बचवा नही गिराउंगी फिर भी दादी नही मानी।पता नही क्यों दादी उससे नाराज थी उसने तो कुछ शैतानी भी ना की थी।तब से मुझे दादी से बहूत डर लगता है ना जाने कब मुझे भी गिरा दे।
पर हाँ, माँ उसे बहुत प्यार करती थी तभी तो कई दिनों तक रोती रहती हर वक़्त उसको याद करके और इतनी कमजोर भी हो गयी और तब में फिर आपसे गुस्सा हो गयी।और मंदिर आना तो दूर मैंने तो स्कूल जाने तक का रास्ता बदल दिया।

To Be Continue:

इस बार दादी फिर बोल रही है क़ि मै धोक लगाऊ, रानो का भाई तो उसकी चोटी खीच के भाग जाता है मुझे नही चाहिए ऐसा शैतान भाई। और पिछली बार कोनसा आपने मांगने पे दे ही दिया था। पर आज ही मुझे ये ख्याल आया कि हो सकता है आपको सुनाई ही न देता हो,  जैसे रानो की दादी को सुनाई नही देता। दादी बोलती है बुढापा बहूत बुरा होता है। इसलिए मैंने सोचा कि मै लिख के बताऊ और हाँ गर आपकी आँखे भी ख़राब है तो मैंने अपना चश्मा जो माँ ने गाँव के मेले से लिया था रख दिया है साथ, तो आप पढ़ लेना।माफ़ कर देना मैने देखा नही आपको तो मुझे लगा आप जवान होंगे पापा के जैसे,पर आप तो बूढ़े हो। पर मंदिर की मूरत मै तो बड़े सुन्दर लगते हो, वैसे पहले दादी भी जवान थी।वो मूरत भी तो कितनी पुराणी है।
तो इस बार कोई बहाना नही, और इस बार तो भाई दे ही देना ,राखी के लिए नही मेरी माँ के लिए, ताकि उसे डांट न पड़े और उसको अपना बचवा गिराना न पड़े।
आपकी
नंदिनी

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