Bas Ab Aur Nahi | बस अब और नहीं | सत्य कथा | Story In Hindi | Hindi Stories

By | July 8, 2018

Bas Ab Aur Nahi ( बस अब और नहीं )

 बिंदिया को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, और कैसे करे, हुआ ये था कि उसकी साढे ग्यारह साल की बेटी पूनम को आज माहवारी शुरू हो गयी थी। खुद से ही बड़बड़ा रही थी, हे आईमाता, ये तूने क्या कर दिया, इत्ती छोटी है अभी हमारी पूनम, 2-3 साल और रुक जाती तो तेरा क्या बिगड़ जाता,अभी वो खुद से बड़बड़ा ही रही थी की तभी पूनम स्नानघर से बाहर निकली और बोली:-तू काहे को इतना रो रही हैं माँ, तू हमारी चिंता ना कर, हम ठीक है। शाला में मैडम जी ने बताया था इसके बारे में, माँ, माहवारी सबको होती हैं। बिंदिया को जैसे यकीन ना हुआ, ये क्या बोल रही है पूनम, उसे सब पता है, पहले से, और शाला में मैडम ये सब भी कभी बताती है क्या, खैर, चलो अच्छा ही है, उसे अपनी पहली माहवारी याद आ गयी, कितना रोई थी वो कि उसे ये क्या हो गया।
बिंदिया के गाँव में, माहवारी के दिनों में लड़की को अलग रखा जाता था, पुरे दिन और रात में भी उसे अकेले ही सोना होता था। कहने को तो बिंदिया के ससुर ठाकुर थे, उनकी बड़ी हवेली थी, पर ये सब आदमी जात के लिए, औरतों को तो इन पाँच दिनों के लिए कारावास जाना ही होता था हवेली के बाहर ही खुली जगह में एक कमरा बना था, सभी पाँच दिन वहीँ रहती, कभी दो की माहवारी साथ आती, तो बड़ी खुश होती थी कि चलो कोई बोलने को साथी तो मिलेगा.

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बिंदिया ने अपने पति से बात कि, बिटिया अभी छोटी है, कैसे खुद को संभालेगी, पर पति ने उसे डाँट के चुप करा दिया कि काहे को छोटी, अभी तो बिटिया सयानी हुई हैं, अरे यही यो निशानी होती हैं लड़की के सयाने होने की,और तुम क्या उसके ससुराल भी जाओगी साथ साथ, अब उसे अकेला भी छोडो, खुद से संभालना सीखने दो। पूनम ने लाख जिद की, माँ हम नही रह पाएंगे यहाँ, देखो ना कितनी बदबू हैं यहाँ पर, इतना अँधेरा, माँ! हम नहीं रह पाएंगे, ले चल ना हवेली अपने साथ, पर बिंदिया पे अपनी बातों का असर न होते देख बोली, एक दिया तो जला दे माँ, इतना अँधेरा है।पर बिंदिया ने बोला, नहीं बिटिया रात को मच्छर आएँगे दिया जलाने से, और फिर तुमको कोई बीमारी हो गयी तो?

बड़ी मुश्किल से बिंदिया की रात कटी, भोर होते ही वो कमरे की ओर चली, अंदर गयी, तो देखा पूनम रोए जा रही थी, लगता था पूरी रात ही रोई है, बिंदिया ने पूछा क्या हुआ मेरी गुड़िया को, तू तो मेरा शेर बच्चा है, माँ को आया देख पूनम माँ से कस के लिपट गयी। रोते रोते ही बोली, माँ! रात को कोई आया था, उसने हमारा मुँह भींच दिया, बहुत कोशिश की हमने तुमको आवाज देने की।माँ, क्यूँ छोड़ गयी हमको यहाँ, ये जगह बहुत बुरी है।

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बिंदिया सिर्फ इतना पूछ पाई, कौन आया था गुड़िया, पूनम बोली, माँ! इतना अँधेरा था , हमें कोई दिखाई न दिया, पहले किवाड़ खुला, हमें लगा तुम आई हो, फिर एक रौशनी(टोर्च) सी गिरी हमपे, फिर वो भी बंद हो गयी, माँ! बहुत दुःख रहा हैं हमको,आज हम मर ही जाएँगे, हमने भागने की कोशिश भी की, पर मुझे पकड़ लिया था किसी ने। बिंदिया को काँटों तो खून नहीं, हे आईमाता! ये क्या अनर्थ कर  दिया, इतनी कठोर कैसे हो गयी तू माँ, और बिंदिया को अपना वो दर्दनाक हादसा याद हो आया, उसके साथ भी तो होता था अक्सर, और कोई उसकी बात पे यकीन नहीं करता, सब कहते कि बिंदिया उस कमरे में न जाने के लिए बहाना बनाती हैं।
बिंदिया पूनम को अपने साथ ले, सीधे अपने पति के पास गई, और सारी बात बोल डाली, तो उसका पति बोला, तू भी न बिंदिया, बच्ची है, कोई सपना देख के डर गयी होगी।

बिंदिया किसी शेरनी सी गरजी, आज ये बच्ची कैसे हो गयी, कल तक तो ये आपको सयानी लग रही थी, देखो एक बार अपनी बच्ची को, मसले गये इसके शरीर को, क्या आपको कुछ भी नहीं दिखता, इस फूल को किसी भेड़िये ने मसला है।अब  उसके पति को बात की गहराई समझ आयी थी, तो धीरे से बोला, देख किसी को नहीं देखा इसने, किसपे इल्जाम लगायेंगे, और सुनेगा कौन इसकी।

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फिर रात घिर आयी थी, बिंदिया ने हाथ जोड़ दिए, अब तो इसे यहीँ रह जाने दो, मत भेजो वहाँ। पर उसका पति बोला, तू बावली हो गयी है क्या, जात से बाहर कर देंगे, गाँव से निकाल देंगे।बिंदिया पूनम को अपने साथ ले गयी और रोता छोड़ आयी उसे उसी कमरे में,जहाँ रोते रोते उसे नींद आ गयी।

फिर आधी रात को, किवाड़ खुला,और कोई भीतर घुसा, और फिर एक रौशनी इधर उधर हुई, जैसे किसी को ढूंढ रही हो, फिर पूनम पे जाकर रुक गयी, पूनम सिहर उठी थी, वो पूनम की और बढ़ा, और तभी वहाँ खड़ी बिंदिया ने अपने हाथ में रखी लकड़ी से जोर से हमला किया, एक जोर की आवाज आई , ये आवाज तो उसके जेठ की थी। बिंदिया मारती चली गयी, मारती रही, फिर पूनम को साथ ले हवेली गयी और पति को बुला लायी|

बिंदिया ने कहा, मुझसे नही रहा गया तो मैं रात को यहीँ आ गयी, इसे मैंने रंगे हाथों पकड़ा है। ये सुनके उसका जेठ बड़ी बेशर्मी से बोला, औरत जात लेके पैदा हुई है तेरी बेटी, और ऐसा भी क्या कर दिया मैंने, तैयार ही तो कर रहा था इसको, मुँह बंद कर हरामजादे, तेरा मुँह तोड़ दूँगी, ये सुनके उसका जेठ बोला चल निकल यहाँ से, हमारे टुकड़ो पे पलती हैं और हमीं को आंखे दिखाती है, जब बाहर जायेगी तब देखता हूँ किस किस भेड़िये से बचा लेगी, पग पग पे भेड़िये मिलेंगे ……..

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और फिर अपने भाई की तरफ देख के बोला, तुम क्या यहाँ बुत बनके खड़े हो, ले जाओ इसे यहाँ से। बिंदिया का पति लगभग घसीटते हुए उसे वहाँ से ले गया।बिंदिया के पति ने उसे समझाने की लाख कोशिश की, बेबुनियाद दलीले पेश की, पगला गयी है क्या, जानती भी है कि किससे जुबान लड़ा रही थी, और कहाँ जायेंगे यहाँ से, क्या करेंगे, डोली में बैठ के आई है तू इस हवेली में, और यहाँ से तेरी अर्थी ही जायेगी, चल और माफ़ी माँग। किन्तु आज वो जिस बिंदिया के सामने खड़ा था, वो तो कोई और ही थी, लगता था जैसे दुर्गा ने आज काली का अवतार ले लिया था, अरे पराये लोगो के बीच, अपना गाँव है, अपने लोग…….और तभी बिंदिया ने पलट के गुस्से वाली आँखों से देखा , बस उसके पति की मुँह से आगे कुछ न निकला।

बिंदिया अपना फैसला सुना चुकी थी, अब ना रहेंगे ईस हवेली में।जब सारी कोशिशें बेकार हो गयी, तो बिंदिया के पति ने बोला, हम कहीं नहीं जा रहें तुम्हारे साथ। बिंदिया के कान में जैसे किसी ने पिघला हुआ लोहा डाल दिया,जो आदमी अभी डोली अर्थी की बात कर रहा था, उसने ये बोला था, यकीन ना हुआ उसे, पर सच तो यहीँ था।बिंदिया, ने अपने पीहर से मिले जेवर लिए, और पूनम को साथ ले निकल पड़ी।

बिंदिया शहर आ तो गयी थी, पर कुछ नहीं जानती थी, कि कहाँ जाना है, उसे बस कोई ऐसी जगह की जरूरत थी, जहाँ आदमी जात से अपनी पूनम को बचा सके, बहुत ढूँढने पर उसे एक विधवा आश्रम मिला पर यहाँ तो सिर्फ विधवा औरतें ही रह सकती थी, बिंदिया ने अपने माथे पे लगी बिंदी को हटाया, अपने हाथों से अपना सिन्दूर पोंछ डाला, और भीतर गयी, उसे वहाँ एक कमरा मिल गया था।

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“कुछ तो बोलो मम्मा” रचना ने पूनम को जोर से झकझोरा, और पूनम अतीत से वर्तमान में लौट आयी।आज रचना (पूनम की बेटी) ने स्कूल से आते ही बताया कि टीचर ने आज उसे bad touch किया, और पूनम अतीत में चली गयी थी। पूनम ने रचना को पास बिठा के सब कुछ बताने को कहा, तो रचना ने बताया कि स्पोर्ट टीचर रोज़ किसी स्टूडेंट को सजा देते है, आज में लेट पहुँची, तो वो मुझे कमरे में ले गये, और मुझे यहाँ (सीने)पर चिकोटी काटी और पूनम ने देखा, निशान था वहाँ पर।आज फिर एक बार किसी फूल को किसी भेड़िये ने मसला था, *बस अब और नहीं*, अब भेड़ियों से दूर जाना काफी नहीं होगा, इनके किए की सजा तो इनको देनी होगी।पूनम ने कुछ सोचा और whats app  के mother group में सभी के साथ ये बात साझा की तथा सबसे अनुरोध किया कि वो अपनी बेटियों से बात करें, तब ये बात सामने आयी की पूनम के ही नहीं, और लड़कियों के साथ भी ऐसा हुआ था, किन्तु संकोच और डर के कारण किसी ने बताया नही घर पर।पूनम को बहुत कोशिश करनी पड़ी सभी को समझाने में, की हमे अब इसका जवाब देना होगा, आख़िरकार सभी पूनम का साथ देने को राज़ी हो गयी।

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अगले दिन सभी लड़कियों की मम्मियाँ प्रधानाध्यापक के पास पहुँची, और सारी बात बताई, स्पोर्ट टीचर को बुलाया गया, और वो बेशर्म साफ मुकर गया, और बोला आप लोग क्या झूठा आरोप लगा रही है मुझ पे और क्यों? पूनम ने उसकी पत्नी को भी बुला दिया था, जिसे तो बिलकुल यकीन ही नही हुआ, उसके लिये तो उसका पति जैसे राम का अवतार था।तभी प्रधानाध्यापक पूनम को साइड में ले गए, और बोले मैडम इनका स्थानांतरण कर दिया जायेगा, आप बात को आगे ना बढ़ाये, विद्यालय की गरिमा का सवाल है? किंतु पूनम को न्याय चाहिए था किन्तु कैसे जिन बच्चीयों ने अपने माता पिता तक को संकोच के कारण कुछ नहीं बताया था, उनसे सबके सामने सच बुलवाना मुमकिन नही था और उसके पास और कोई सबूत भी नही था।

तब तक स्पोर्ट टीचर भी वहाँ पहुँच चूका था, दोनों पूनम पर दबाव बनाने लगे कि बात को ख़त्म किया जाये,पूनम पर अपनी बातों का असर न होते देख, प्रधानाध्यक बोला, सबूत क्या हैं आपके पास, क्या आप सबके सामने अपनी बच्चीयों के शरीर के निशान दिखा पाएंगी, और मैडम बदनामी तो आपकी और बच्चीयों की भी होगी, ये समाज तो वैसे भी महिला को ही दोषी मानता हैं, आप हमारा कुछ नही बिगाड़ सकती, अब क्या करें दिल तो बच्चा है जी, फिसल जाता हैं अब कोई भँवरा कितना संभाले खुद को,जब सामने इतनी कच्ची कालिया रहें।

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पूनम ने एक जोरदार तमाचा प्रधानाध्यापक के मुँह पे मारा, सारा हॉल उधर देखने लगा, आपकी हिम्मत कैसे हुई, आपको मेरी मानहानि करने का बहुत बुरा नतीजा भुगतना होगा , उसने देखा कि पूनम मुस्कुरा रहीं थी,पूनम ने अपने पेन में लगा कैमरा निकाला, और उसमें से वीडियो मोबाइल में ट्रान्सफर करके, मोबाइल प्रधानाध्यापक की तरफ किया, वीडियो में सारा घटनाक्रम कैद हो चूका था, अब तक तेवर दिखाने वाले प्रधानाध्यापक जी पूनम के पैरों में गिरे पड़े थे, माफ़ कर दीजिए मैडम, हमारी जिंदगी बर्बाद हो जायेगी, हमारी ईज्जत, प्लीज पूनम जी, हम आपको वचन देते है हम ख़ुद अपना त्यागपत्र दे देंगे, आप जो बोलोगे हम वो करने को तैयार हैं।

दरअसल पूनम को पहले से ही एहसास था कि बिना सबूत के वो कुछ न कर पायेगी, इसलिए उसने अपने NGO में बात की थी इस बारे में, और वहाँ से उसे मिला, सागरिका का नंबर, जो एक पत्रकार थी, उसी ने उसे ये कैमरा दिया था जिसका उपयोग वो अपने string operation के लिए करती थी, सागरिका भी उनके साथ आई थी।

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घर पहूँच कर पूनम ने सब कुछ बिंदिया को बताया, बिंदिया आज बहुत खुश थी, अपने जेठ को सजा न दिलवा पाने का मलाल हमेशा से उसके मन में था, पर आज वो खुश थी की पूनम के मन में अब कोई मलाल न रहेगा। अगले दिन मुख्य समाचार पत्र में पूरी घटना थी, और शीर्षक था, *बस अब और नहीं*, और साथ ही परिजनों से विशेष निवेदन किया गया था कि
1) वो अपने बच्चो को good or bad touch के बारे में बताएं,
2) ना सिर्फ बेटी बल्कि अपने बेटों को भी संस्कार दे, क्योंकि बचपन की गीली मिट्टी को ढालना आसान होता है।
3) 4 साल तक बच्चों को खुद नहलाये रोज नहीं तो एक दिन छोड़ के जरूर, और देखे कि कुछ ऐसा तो नहीं हो रहा है जो गलत है।
4) अपने बच्चे की बात सुने, गर वो पढ़ने के लिए ट्यूशन न जाना चाहें, तो इसे उसका पढाई से जी चुराना न समझे, उससे बात करें ,यकीन दिलाये कि आप उनका साथ देंगे हमेशा।

आपकी
नंदिनी

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