Computer Generations | कम्प्यूटर की पिढीयॉ | History Of Computer Generations

By | August 27, 2018

कम्प्यूटर की पिढीयॉ | Computer Generations

कम्प्यूटर को 5 पीढीयों मे विभाजित किया गया है जो कि निम्नलिखित है

प्रथम पीढीः- 1946 से 1958

  • प्रथम पीढी के कम्प्यूटर में वेक्युम टुयूब ( Vacuum tube ) का सर्किट के रूप उपयोग किया गया। तथा मैमोरी के लिए चुम्बकीय टेप़ ;( magnetic drums ) का उपयोग किया गया।
    यह कम्प्यूटर बहुत ही विशाल होते थे एंव इन्हें रखने के लिए सम्पूर्ण कक्ष की आवयकता होती थी।
    इन्हें में लेने के लिए अधिक खर्चा करना पडता था तथा उपयोग करते समय बहुत अधिक मात्रा में विद्युत का उपभोग होता था। फलस्वरूप इससे अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा ( Heat ) उत्पन्न होती थी।
    प्रथम पीढी के कम्प्यूटर माीनी भाषा ( Machine language ) पर आधारित थे यह कम्प्यूटर के द्वारा समझे जाने वाली निम्न श्रेणी ( Low level ) की भाषा थी। यह कम्प्यूटर एक समय में एक ही समस्या का समाधान करने में समर्थ था।
    यह इनपुट पंचकार्ड तथा पेपर टेप पर आधारित था तथा आउटपुट के लिए प्रिंन्ट आउट का उपयोग किया जाता था।

द्वितीय पीढीः- 1959 से 1964

  • द्वितीय पीढी के कम्प्यूटर में ट्रांजिस्टर( Transistors ) द्वारा वेक्युम टुयुब ( Vacuum tube ) को रिप्लेस कर दिया गया । ट्रांजिस्टर का विकास Willom Shockly ने 1947 में किया था। एक ट्रांजिस्टर 40 वेक्युम टुयुब के बराबर कार्य करने मे समर्थ था।
  • इस पद्वति से कम्प्यूटर छोटे तीव्र गति वाले, सस्ते, कम विद्युत का उपभोग करने वाले तथा ज्यादा भरो से मंद हो गये। परन्तु अभी भी भारी मात्रा में ऊष्मा का विसर्ज न होता था जो कि कम्प्यूटर को खराब कर सकती थी।
  • द्वितीय पीढी के कम्प्यूटर में बाइनरी की जगह सिम्बोलिक या असेम्बलिक ( Assembly ) भाषा का उपयोग किया गया। इस भाषा में प्रोग्रामर शब्दों ( words ) में दिषा निर्दष देने में समर्थ था।
  • द्वितीय पीढी के कम्प्यूटर भी इनपुट के लिए पंचकार्ड तथा आउटपुट के लिए प्रिन्टआउट पर निर्भर थे।
  • इस पीढी के कम्प्यूटर में सर्वप्रथम भण्डारण क्षमता ( storage capacity ) का विकास हुआ जिसके माध्यम से दिषा निर्दष एवं डाटा को मैमोरी में स्टोर किया जा सकता था। इस व्यवस्था मे भण्डारण क्षमता को बढाने के लिए मैगनेटिक ड्रम की जगह मैगनेटिक कौर ( magnetic core ) को लागू किया गया।

तृतीय पीढी 1965 से 1970

  • इन्टीग्रेटेड सर्किट( Integrated circuit) का आविष्कार इस पीढी की महत्वपूर्ण देन थी । IC का विकास 1958 में Jack Kilby ने किया था। इसमें IC Technology  ( SSI ) का प्रयोग किया गया  SSI  का पूरा नाम Small Scale Integration है।
    ट्रांजिस्टर को अतिसुक्ष्म करके उनको सिलिकोन चिप( silicon chip ) के उपर प्लेस किया गया जिसको सेमीकन्डक्टर कहा गया, परिणास्वरूप गति एवं दक्षता मेण् अभूतपूर्व फायदा हुआ।
  • द्वितीय श्रेणी की तुलना में यह कम्प्यूटर बहुत ही सस्ते व छोटे थे तथा बिलियन निर्देशों को एक्सीक्यूट करने में समर्थ थे।
    यूजर को इस पीढी के कम्प्यूटर में KEYBOARD व मोनिटर पर कार्य करने का अवसर मिला। इस पीढी मे ऑपरेटींग सिस्टम की मदद से बहुत सारी ऐप्लीकेान एक साथ रन करना सम्भव हुआ। ऑपरेटींग सिंस्टम एक सेन्ट्रल प्रोग्राम था तथा यह मेमौरी को कन्ट्रोल करने का भी कार्य करता था ।
  • इस पीढी में कम्प्यूटर बहुत बडी आबादी को उपलब्ध हुआ

चतुर्थ पीढी 1971 से

  • इस जनरेशन मे प्ब् की आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाने लगा था।IC की यह तकनीक VLSI थी इसका पूरा नाम Very Large-Scale Integration  हैं। चतुर्थ पीढी के साथ ही माईक्रो प्रोसेसर (Microprocessor ) का विकास हुआ। यह एक ऐसा डिवाईस था जिसमें हजारों इन्टीग्रेटेड सर्किट को एक सिलिकन चिप के उपर लगाया गया।
  • जैसे जैसे कम्प्यूटर साईज में छोटे होते गये उनको आपस मे लिंक करना सम्भव हुआ, जिससे नेटवर्क प्रणाली का जन्म हुआ। नेटवर्क ने आगे जाकर के इन्टरनेट ( Internet) को डवलप करने में योगदान दिया।
  • चतुर्थ पीढी के कम्प्यूटर में GUI माउस तथा हैंड हैल्ड डिवाईस (Handheld device ) का आगमन हुआ।

पंचम पीढी भविष्य की ओर अग्रसरः-

  • इस जनरेशन मे आई सी की आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाने लगा था। IC की यह तकनीकी ULSI थी इसका पूरा नाम Ultra Large Scale Integration हैं।
    यह आर्टिफिसियल इन्टेलिजेन्स पर आधारित है तथा इसका विकास जारी है इस पीढी का लक्ष्य ऐसे सिस्टम विकसीत करना है जो मानव की भाषा को समझकर उनके द्वारा दिये गये निर्दशो की पालना कर सके तथा साथ ही सीखने की क्षमता रखते हो।
  • वर्तमान मे भी कुछ ऐप्लीकेशन है जैसे वोईस रिकोगनिशन जिनका उपयोग किया जा रहा है ।

अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर

  • नैनो कम्प्यूटर -नैनो स्तर  पर निर्मित नैनो ट्यूब्स के प्रयोग से अत्यन्त छोटे व विशाल क्षमता वाले कम्प्यूटर के विकास का प्रयास किया जा रहा है ।
  • क्वांटम कम्प्यूटर – यह प्रकाश के क्वांटम सिद्धान्त पर आधारित है जिसमें आंकड़ों का संग्रहण और संसाधन क्वांटम कण कहते है । ये कण युग्म में रहते है और इन्हे ‘क्यू बिट्स’ कहते है ।

 

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