Folk Dance Of Rajasthan | राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य | Folk Dances Of India | RPSC, UPSC HINDI NOTES

By | May 30, 2018

Folk Dance Of Rajasthan is completely explained in this article.

Folk Dance Of Rajasthan

राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य

1 घूमर

  • यह राजस्थान का लोक नृत्य है
  • राजस्थान नृत्य की आत्मा सिरमौर व सामंती नृत्य कहते हैं
  • तीज त्यौहार गणगौर आदि मांगलिक अवसरों पर केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है
  • पुरुष इसे नहीं करते परंतु यह पुरुष रस प्रधान नृत्य है
  • लहंगे के घूम के कारण ही इसे घूमर का जाता है
  • घूमर में हाथों का लचकदार संचालन आकर्षक होता है
  • इसमें विशेष आठ चरण होते हैं जिसे सवाई कहते हैं
  • इस में ढोल नगाड़ा शहनाई वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है
  • इसे रजवाड़ी लोक नृत्य भी कहा जाता है

2 कच्छी घोड़ी

  • शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकनृत्य जो अब व्यावसायिक रूप धारण कर चुका है
  • यह नृत्य पुरुषों के द्वारा किया जाता है
  • इस में पुरुष पीठ पर लकड़ी की बनी घोड़ी बांधकर नृत्य करते हैं
  • चार चार की दो पंक्तियों में आमने सामने खड़े होकर नृत्य करते हैं
  • पंक्तियों के बनते व बीखकरते समय फूलों की पंखुड़ियों के खिलने जैसा आभास होता है

3 अग्नि नृत्य –

  • जसनाथी संप्रदाय के पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य
  • बीकानेर का कतरियासर गांव इसका मुख्य केंद्र है
  • इस नृत्य को करते समय आग से मतीरा फोड़ना व तलवार के करतब दिखाना प्रमुख है
  • नृत्य करते समय नर्तक फते फते बोलते हैं
  • इस नृत्य मैं आग के साथ राग व फाग का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है
  • बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने इस नृत्य वह उनके कलाकारों को संरक्षण प्रदान किया

4 घुड़ला नृत्य –

  • जोधपुर के राजा सातल की याद में।
  • जोधपुर में शीतला अष्टमी से लेकर गणगौर तक महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य
  • इस नृत्य में महिलाएं छिद्रित मटके में दीपक रखकर नृत्य करती है
  • मणिशंकर गांगुली, देवीलाल सामर, कोमल कोठारी ने इस नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान किया

5 ढोल नृत्य –

  • ढोल नृत्य जालोर क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है
  • ढोली, माली, भील, सरकड़ा आदि जातियों में पुरुषों द्वारा मांगलिक अवसर पर किया जाता है
  • यह थापना शैली में नृत्य किया जाता है
  • जय नारायण व्यास द्वारा कलाकारों को प्रोत्साहन दिया गया

6 भवाई नृत्य

  • उदयपुर संभाग में गुजरात के सीमावर्ती इलाको मे भवाई जाती के द्वारा किया जाने वाला नृत्य जो अब व्यावसायिक रूप धारण कर चुका है

इस लोक नृत्य में तलवारो पर नाचना मुंह से रूमाल उठाना थाली के किनारों पर नाचना गिलासों के किनारे पर नाचना, सिर पर सात-आठ मटके रख कर नृत्य आदि करतब किये जाते है।

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