Maa and Masi | Maa Ka Pyar | Story of Maa And Masi Ka Pyar | Mother Love | माँ और मासी

By | May 29, 2018

ये पिछले साल की बात है, जब रमजान का महीना चल रहा था! और उस दिन अलविदा जुम्मा था ( रमजान का आखिरी दिन )! ना जाने किसने ईशु ( मेरी 8 साल की बेटी ईशरत) को बता दिया की इफ्तारी से पहले माँगी हर मुराद पूरी होती है, और इसी वजह से उसने लाख मना करने के बाद भी रोज़ा रखा! मैंने गौर किया कि इफ्तारी के पहले की जाने वाली दुआ ही उसका driving force थी! खैर इफ्तार (रोजा खोलने का समय)का समय हुआ, और हमारी ईशु ने मुराद माँगना शुरू किया, ये मुराद काफी लम्बी चली थी! दस्तरख्वान पे बैठने के बाद हमने खजूर खाये और अपना रोज़ा खोला! काफी पूछने के बाद ईशु ने बताया कि उसने अल्लाह मियां से एक स्टूअर्ट लिटिल माँगा है। Maa and Masi

To Be Continue of Maa and Masi:

ईद के दिन ईदी के रूप में, मैं अपनी ईशु के लिए एक चूहा ले आयी थी जिसे ईशु अपना बेबी कहती थी। रात को अपनी बेबी को लोरी सुनाते सुनाते खुद भी सो गयी। अगले रोज, बेबी को दूध पिलाने का कार्यक्रम शुरू किया गया, पर उसे कटोरे में रखा दूध पीना कहाँ आता था।

ईशु मेरे पास आकर बोली की मम्मा जब बेबी दूध नही पीता तो मम्मा को बुरा लगता है ना, अब से मैं हर रोज दूध पिया करूँगी, फिर मेरा बेबी भी अपनी मम्मा की तरह दूध पी लेगा ना और अगली रोज उसने बिना ना नुकुर के दूध पिया, किन्तु उसका बेबी आज भी नही समझ रहा था कि दूध कैसे पीना है, ईशु उसे बताये जा रही थी, की बेबी ऐसे पी लो वैसे पी लो, दूध नहीं पियोगे तो strong कैसे बनोगे, height कैसे बढ़ेगी, पर बेबी तब भी नही समझ रहा था, कि तभी ईशु ने गाना शुरू किया “सोनू थने म्हारे पे भरोसो नई की,नई की! अब ये गाने का असर था या भूख का, बेबी ने दूध पीना शुरू किया!

ईशु मेरे गले में बाँहे डाल के बोली मम्मा, बेबी का नाम तो सोनू है, देखो, सोनू सुनते ही दूध पी लिया! तो अब बेबी का नामकरण हो चूका था! अब तो बस ईशु का हर काम सोनू से शुरू और सोनू पे ही खत्म होता था! दिन भर सोनू सोनू, ईदी के पैसे से सोनू के लिए मालगाड़ी लायी गयी, जिसके डिब्बे में बैठ के सोनू ने ईशु के पेरिस स्विट्ज़रलैंड को देखा!

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ईशु ,सोनू के आ जाने से बहुत ही समझदार बन गयी थी, जिम्मेदार भी! अपना सामान सलीके से रखना, ताकि सुबह वो आराम से मिले, और बचे समय में वो अपने सोनू के साथ समय बिताये। उसे हर बात पे लगता कि सोनू वही सीखेगा जो ईशु को करते हुए देखेगा, और ईशु को एक अच्छी मम्मा जो बनना था। ईशु चाहती थी की उसका सोनू एस्ट्रोनॉट बने, वो अब पढ़ाई भी अच्छे से दिल लगा के करती, खुद भी पढ़ती, फिर सोनू को भी पढ़ाती। सोनू के आ जाने से मुझे इतना फायदा होगा, सोचा न था।

एक दिन जब ऑफिस से लौटी तो अपने बगीचे से एक बिल्ले को निकलते देखा, मेरी धड़कने मानो थम सी गयी, भाग के मैं ईशु के कमरे में पहुँची, सोनू ईशु के पास ही अपने पिंजरे में था, उसे देख मेरी साँस में साँस आयी! अब मुझे डर लगने लगा था कि गर किसी रोज़ सोनू को कुछ हो गया तो! मैंने ईशु को इसके लिए तैयार करने की कोशिश की, और एक दिन उसको कहा कि अब सोनू को दूसरे शहर भेज देते है पढ़ने के लिए, पर उसने बोल दिया कि वो उसे अच्छे से पढ़ाती है।

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एक दिन जब मैंने पूछा कि जब इसकी शादी होगी तब तो ये चला जायेगा, पर ईशु ने बड़े इत्मिनान से बोला, क्या मम्मा मेरा सोनू कोई लड़की थोड़ी है, ये तो दुल्हनिया लेके आएगा। दिन निकल रहे थे, और सब कुछ ठीक भी था, बल्कि बेहद अच्छा था। फिर एक दिन ऑफिस में पता चला कि कोई ट्रेनिंग है जिसके लिए सभी को जाना था, मैंने कभी ईशु को एक रात के लिए भी खुद से दूर नही रखा था, किन्तु इस बार जाना भी जरूरी था! तय हुआ कि सोनू और ईशु दोनों, ईशु की मासी के पास रहेंगे! दोनों को मासी के पास छोड़ मैं ट्रेनिंग के लिए निकल गयी।

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दो दिन बाद जब मैं आयी तो ईशु दौड़ के मेरे से लिपट गयी, मम्मा आप नहीं जाया करो, मुझे आपके बिना अच्छा नहीं लगता, मैंने बोला क्यों मासी थी तो मेरे बच्चे के पास, और मासी भी तो माँ जैसी होती है, तब वो बोली “माँ जैसी होती है, पर माँ तो नहीं होती, माँ जैसा तो कोई नहीं होता। रात को सोने से पहले, ईशु सोनू के पिंजरे के साथ मेरे कमरे में आयी और पूछा कि मम्मा सोनू की मम्मा कहाँ है? मैंने बोला क्यों आप हो ना सोनू की मम्मा, तब ईशु बोली नहीं मम्मा, मैं तो मासी हूँ, और माँ तो माँ होती है। कुछ समझ नहीं पायी मैं, फिर भी बोल दिया की जो पार्क है चौराहे के पास, वहाँ रहती है इसकी मम्मा।

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तब ईशु ने बोला की सोनू को भी तो अपनी मम्मा की याद आती होगी, कल हम सोनू को इसकी मम्मा के पास छोड़ आएँगे, खुश होगा ना ये ,और हाँ सोनू मियां मासी को भूल नहीं जाना।
अगले दिन हमने सोनू के साथ खूब सारी सेल्फी ली, और शाम को उसे पार्क में छोड़ आए! आंसू आ गए थे हम दोनों की आँख में, जैसे कोई अपना छोड़ के जा रहा हो।
मैं एक तलाकशुदा महिला हूँ, हमेशा डर रहता था कि अपनी बच्ची को रिश्तों की अहमियत समझा सकूँगी या नहीं, पर सोनू ने सब सीखा दिया था, जिसे हम प्यार करते है, उसे खोने से डरते है, और उसे बांध के रखते है, पर उसकी खुशी के लिए उसे छोड़ देना, मेरी ईशु ने आज ये सीख लिया था!

दस दिन हो गए ईशु रोज़ पूछती कि मम्मा सोनू कब आएगा, अब मै क्या बताती, तो एक दिन एक खत लिखा!

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मेरी प्यारी मासी
आप चाहते हो न की आपका सोनू एस्ट्रोनॉट बने, तो मैं अमेरिका जा रहा हूँ, पढ़ने के लिए, ताकि मैं एस्ट्रोनॉट बन सकूँ जल्दी जल्दी! आपकी बहुत याद आती है मुझे! आप अपना ध्यान रखना!
आपका
सोनू

और ये चिट्ठी पढ़ के तो ईशु उछल पड़ी , अरे वाह , मम्मा आपको पता है मेरा सोनू अमेरिका गया है एस्ट्रोनॉट बनने!

नंदिनी

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